
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय विवादों और विपक्षी हमलों से घिरे हुए हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 महीने में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह सांधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार ज्ञानेश कुमार के फैसले पर लिखित आपत्ति जताई | आरोप है की ज्ञानेश कुमार ने कई महत्व्पूर्ण फैसले बाकि आयुक्तों को अँधेरे में रख कर लिए, जो की नियम के खिलाफ है| आरोप यह भी है की देश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए है, वहीँ आयुक्त सांधू ने फॉर्म-6 में जोड़े गए नए सवालो को लेकर आपत्ति जताते हुए उसे अवैध बताया था, लेकिन उसे नज़रंदाज़ कर दिया गया | 22 जनवरी को एक नया सिस्टम ECI-NET लॉन्च किया गया जो देश के लगभग 1 बिलियन वोटर्स के डाटा को संभालने के लिए 40 से अधिक एप्स और पोर्टल्स को एक साथ जोड़ता है, चुनाव आयोक्त का कहना है की इससे पारदर्शिता और भरोसा बढेगा, विवाद यह है की पहले वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार जमीन स्तर पर काम करने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) के पास होता था, अब इस नए सिस्टम के ज़रिये यह कंट्रोल दिल्ली स्थित केन्द्रीय कार्यालय के पास चला गया है, जिससें स्थानीय अधिकारियों की भूमिका सिमित हो गई है, अन्य चुनाव आयोक्त ने इस पर चिंता जताई थी और इंडिपेंडेंट ऑडिट की मांग की थी, जिसे CEC ने अनदेखा कर दिया था | इस पुरे विवाद को लेकर विपक्ष्य ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इसे सीधे तौर पर इसे वोटो की चोरी का नाम दिया है, वही INDIA ब्लाक 30 सितम्बर को दिल्ली में बैठक कर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग लेन की रूप रेखा तैयार कर रहा है | विपक्षी डालो का स्पष्ट आरोप है की वोटर लिस्ट में किये गए एक तरफ़ा बदलाव और करोड़ो नाम हटाना आगामी चुनाव को प्रभावित करने की सोची- समझी साजिश है |
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